Saturday, 30 November 2013

हकीकत

हकीकत



आंसू को हंसी में बदल के तो देख,
ज़िन्दगी के ढलान में संभल के तो देख ,
असफलता को अपनी ताक़त बना के तो देख ,
आसमानो को कभी ठेहर के तो देख .


रिस्तों को कभी निभा के तो देख ,
रिश्तेदारी कभी बना के तो देख ,
संग उनके , तू  मुस्करा के तो देख ,
अपना बना , कभी गले लगा के तो देख .



ज़िन्दगी में भटकना बंद कर के तो देख ,
दिल कि धड़कनो को बढ़ा के तो देख ,
छू आसमानो को , पर ज़मीन से सीडी बना के तो देख ,
बुलंदी होगी तेरी , खुद कि किस्मत पर विश्वास कर के  तो देख .



साथ तेरा जहां देगा ,
कभी खुद को छोड़ , दूसरों के लिए जी के तो देख ,
वक़्त भी साथ तेरे चलेगा ,
तू वक़्त पे दुसरून का साथ निभा के तो देख .



खुशियां तो आंसू का पैगाम लती है ,
तू फिर भी सचाई से जी के तो देख ,
कर यकीन अपनी मेहनत पर ,
फिर भी इंसानियत को दिल में जगा के तो देख .

  
  द्वारा -

               अंकित मिश्रा

No comments:

Post a Comment